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Search: Posts Made By: Bhrung
Forum: Ghazal Section 20th April 2016, 04:13 PM
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Posted By Bhrung
सोचता हूँ किस तरह पहुँचा हूँ मैं मुल्क-ए-अद

सोचता हूँ किस तरह पहुँचा हूँ मैं मुल्क-ए-अदम
कुछ रकीबों की दुवाएँ, यारों के कुछ हैं करम

क्या बताऊँ किस तरह, कैसे, कहाँ फिसले कदम
ख़्व्वाब से जागा हूँ कैसे, किस तरह टूटे भरम

इश्क़ भी करते नहीं...
Forum: Ghazal Section 7th February 2016, 08:10 PM
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कईं बार ऐसा हुआ मुस्कुराते

कईं बार ऐसा हुआ मुस्कुराते
उमड आये आँसू हँसी आते आते

निगाहों निगाहों में क्या कुछ कहा है
जवानी गुज़रती वह होटों पर आते

जभी जानिब-ए-मंज़िल-ए-इश्क जाते
कभी धुँद छाती, कभी मोड आते

किसी दिन...
Forum: Ghazal Section 22nd December 2015, 05:46 AM
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धन्यवाद. मैंने "lehlehaane" (लहलहाने) लिखा...

धन्यवाद. मैंने "lehlehaane" (लहलहाने) लिखा है.
Forum: Ghazal Section 20th December 2015, 09:39 PM
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रुक रुक के चल रहा है कारवान-ए-ज़िंदगी

रुक रुक के चल रहा है कारवान-ए-ज़िंदगी
शायद यही है दौर-ए-इम्तहान-ए-ज़िंदगी

रुसवा कदम कदम मुझे किया है जीते जी
मरघट चली न आये देने ताने ज़िंदगी

दुष्मन खडे दराँती हाथ में लिये हुए
डर है कहीं लगे न...
Forum: Ghazal Section 25th June 2015, 07:36 AM
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वाह वाह! बहुत खूब, मस्तजी. जवान नग्मे हँसी...

वाह वाह! बहुत खूब, मस्तजी.

जवान नग्मे हँसी क़िस्से यूँ अब होंठों पे रहते है
ये क्यों हर बात पर अक्सर तुम्हारी बात होती है
यह शेर तो बेहद पसंद आया.
Forum: Ghazal Section 21st June 2015, 12:31 PM
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शराब ना शबाब है, करें बसर तो किस तरह

शराब ना शबाब है, करें बसर तो किस तरह
कबाड में बिके सुखन, करें गुजर तो किस तरह

न कान हैं खुले यहाँ, न द्वार मन के हैं खुले
यहाँ किसी की शायरी करे असर तो किस तरह

वह रेत में उठा के नक्षेपा...
Forum: Ghazal Section 21st February 2015, 05:33 PM
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रिहाई चाहता हूँ, अब कफस में जी नहीं लगता

रिहाई चाहता हूँ, अब कफस में जी नहीं लगता
बहुत ढूँढा, मगर अपना यहाँ कोई नहीं लगता

बुझा जाता हूँ खुद, अब और आँधी की ज़रूरत क्या?
उजाला चश्मेतर का क्या तुम्हें फानी नहीं लगता?

यह मुफलिस की...
Forum: Ghazal Section 23rd December 2014, 04:58 PM
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ताउम्र चलने के सिवा चारा नहीं है

ताउम्र चलने के सिवा चारा नहीं है
है कौन जो इस राह का मारा नहीं है?

दुनिया न रोशन कर सका तू, ना सही, पर
क्या तू किसी की आँख का तारा नहीं है?

है आग की लपटों में तेरी ज़िंदगी तो
खुशियाँ मना,...
Forum: Ghazal Section 12th November 2014, 03:36 PM
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बेवफा निकले लगे जो यारसे, हम क्या करें

बेवफा निकले लगे जो यारसे, हम क्या करें
चाक दामन की शिकायत खारसे हम क्या करें

नाम उनके कर दिया था दिल हमेशा के लिये
वह रहे कुछ दिन किरायेदारसे, हम क्या करें

तंगदिल ऐसे नहीं हम, है अभी काफी...
Forum: Ghazal Section 8th November 2014, 10:43 AM
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Meri ghazal padhnewaale aur daad denewaale sabhi...

Meri ghazal padhnewaale aur daad denewaale sabhi ko main dhanyavaad deta hoon. Zarranawaazi ka shukriya, doston.
Forum: Ghazal Section 6th November 2014, 09:58 AM
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Posted By Bhrung
Zindagi ki daud mein neend kam, aaraam kam

ज़िंदगी की दौड में नींद कम, आराम कम
इस लिये दे पाते हम ख़्व्वाब को अंजाम कम
Zindagi ki daud mein neend kam, aaraam kam
Is liye de paate hum khwaab ko anjaam kam

अब खुमार आता नहीं, दर्देदिल जाता...
Forum: Shayri-e-Dard 7th October 2014, 06:11 PM
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Zulf bikhri, jism bikhara, rooh bikhri Umrbhar...

Zulf bikhri, jism bikhara, rooh bikhri
Umrbhar maasoomiyat majrooh bikhri

- Bhanwar
Forum: Ghazal Section 29th July 2014, 05:32 PM
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Tajurbon ki talkhi, khayaalon ki misri

Tajurbon ki talkhi, khayaalon ki misri
Ghazal inse hokar hi kaagaz pe utarii

Dawaat-o-kalam se hi gar baat banti
To shair n milte kachahari kachahari?

Dhali husn ke saath paabandiyaan bhi...
Forum: Humourous Shayri 24th October 2013, 06:13 PM
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शायर-ए-नाकाम हैं, पर है तबीयत शायराना

एक हज़लनुमा रचना:

शायर-ए-नाकाम हैं, पर है तबीयत शायराना
माँगते फिरते हैं हम सबसे नसीहत शायराना

हमवज़न अल्फ़ाज़ का हमको नहीं है इल्म बिल्कुल
और बेहरों से हमारी है बगावत शायराना

हाँ,...
Forum: Ghazal Section 21st October 2013, 10:45 PM
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लगाओ ना गले मुझको, बहारो

लगाओ ना गले मुझको, बहारो
कहीं तुम भी न मुरझाओ, बहारो

टली है ना कभी पतझड टलेगी
खिलो लेकिन न इतराओ, बहारो

कली को फूल करना चाहते हो
इरादा क्या है बतलाओ, बहारो

कभी गुलशन, कभी...
Forum: Ghazal Section 29th August 2013, 10:01 PM
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Mohabbat ki karoon baatein, ye mujhse ho nahin sakta

मुहब्बत की करूँ बातें, ये मुझसे हो नहीं सकता
किसी कीमत पे आज़ादी मैं अपनी खो नहीं सकता
Mohabbat ki karoon baatein, ye mujhse ho nahin sakta
Kisi keemat pe aazaadi main apni kho nahin sakta
...
Forum: Ghazal Section 2nd July 2013, 12:03 AM
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Seene se jo na lagaaye zakhm mere

सीने से जो ना लगाए ज़ख्म मेरे
क्यों वफ़ा उनसे निभाए ज़ख्म मेरे
Seene se jo na lagaaye zakhm mere
Kyon vafa unse nibhaaye zakhm mere?

यह न समझो बेसबब हसती है ज़ालिम
गाहे गाहे याद आए ज़ख्म मेरे
Ye...
Forum: Ghazal Section 24th May 2013, 12:37 PM
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Har kisi ki aankhon mein bheega sa hai manzar koi

हर किसी की आँखों में भीगासा है मंज़र कोई
पर-कटे ख़्व्वाबों पे शायद रो रहा है हर कोई
Har kisi ki aankhon mein bheega sa hai manzar koi
Par-kaTe khvaabon pe shaayad ro raha hai har koi

इस कदर...
Forum: Shayri-e-Dard 24th May 2013, 12:11 PM
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Bahot khoob! Behad pasand aayee.

Bahot khoob! Behad pasand aayee.
Forum: Ghazal Section 13th May 2013, 03:57 PM
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ta'a-umr chalne ke siva chaara nahi hai

ताउम्र चलने के सिवा चारा नहीं है
है कौन जो इस राह का मारा नहीं है?
ta'a-umr chalne ke siva chaara nahi hai
hai kaun jo is raah ka maara nahi hai?

दुनिया न रोशन कर सका तू, ना सही, पर
क्या तू...
Forum: Ghazal Section 12th April 2013, 07:51 AM
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@Misum Moosavi : shukriya, ta'arruf

Bahot shukriya, Misum sahab. Haan, 'Bhanwar' ye mera takhallus hai. Rahi baat ta'arruf ki, to shaayri ka shauq rakhnewala ek aam aadmi hoon. Aur jaankari yahaan...
Forum: Ghazal Section 10th April 2013, 09:10 AM
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"mujhe woh yoon hi bhula dein yeh ghair mumkin...

"mujhe woh yoon hi bhula dein yeh ghair mumkin hai
mai unki zindagi ka ek waaqiya toh nahi"

Wah! bahot khoob. Makta bhi bahot achchaa laga.
Forum: Ghazal Section 10th April 2013, 09:07 AM
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Bahot shukriya, Kwahish sahaab.

Bahot shukriya, Kwahish sahaab.
Forum: Ghazal Section 10th April 2013, 09:06 AM
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Bahot bahot shukriya, Kwahish sahaab, Zainy...

Bahot bahot shukriya, Kwahish sahaab, Zainy sahaab. :)
Forum: Ghazal Section 5th April 2013, 01:01 PM
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Ek pal aayee nazar ghoonghaT se soorat aap ki

एक पल आयी नजर घूँघट से सूरत आप की
यह हवा का खेल था या फिर इनायत आप की?
Ek pal aayee nazar ghunghat se soorat aap ki
Ye hawa ka khel tha ya phir inaayat aap ki

चैन छीने, नींद भी छीने मुहब्बत...
Forum: Ghazal Section 26th March 2013, 11:02 PM
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Itni vajah hai kaafi unko pukarne ko

इतनी वजह है काफी उनको पुकारने को
कुछ ग़म नहीं है बाकी शेरों में ढालने को
Itni vajah hai kaafi unko pukarne ko
Kuchh gham nahi(n) hai baaki sheron mein dhaalne ko

मुड़तें थे पाँव घर को, यह प्यार...
Forum: Ghazal Section 16th March 2013, 09:59 PM
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इतनी वजह है काफी उनको पुकारने को

इतनी वजह है काफी उनको पुकारने को
कोई ग़म नहीं है बाकी शेरों में ढालने को

मुड़तें थे पाँव घर को, यह प्यार था किसी का
वरना मकाँ कई थे रातें गुजारने को

यह जानती है शायद दरपर खडी बलाएँ
अब तू...
Forum: Ghazal Section 1st February 2013, 07:57 AM
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कुछ ज़ियादा माँग तो बैठा नहीं भगवान से?

कुछ ज़ियादा माँग तो बैठा नहीं भगवान से?
आदमी बनकर मिले हर आदमी इन्सान से

सुन रहा हूँ देश ने की है तरक्की इस कदर
है दिवाली के दिये भी चीन से, जापान से

ज़हमत-ए-आतंक करता है पडोसी किस लिये?
हैं...
Forum: Ghazal Section 4th January 2013, 03:37 PM
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पूछते हैं लोग क्यों नाशाद मेरे गीत हैं

पूछते हैं लोग क्यों नाशाद मेरे गीत हैं
हसरत-ए-नाकाम की फरयाद मेरे गीत हैं

मैं तो लिखता हूँ के ग़मगीं दिल बहल जाए ज़रा
फिर रुलाते हैं मुझे, जल्लाद मेरे गीत हैं

फलसफा कोई नहीं, ना धर्म की...
Forum: Ghazal Section 7th March 2012, 08:24 PM
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कैसे छलकाते हैं पैमाना सिखा

कैसे छलकाते हैं पैमाना सिखा
रिंद को तहज़ीब-ए-मैखाना सिखा

मस्त होना आप ही आ जाता है
मस्त होकर होश में आना सिखा

चाहता हूँ बेझिझक कुछ दिन जिऊँ
किस तरह बनते हैं दीवाना सिखा

हँसते हँसते...
Forum: Ghazal Section 1st March 2012, 02:09 PM
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Thank you, zainy, amd Zindagi5.

Thank you, zainy, amd Zindagi5.
Forum: Ghazal Section 19th February 2012, 01:34 PM
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Posted By Bhrung
kaun kehta hai mohabbat ka janaazaa nikla

kaun kehta hai mohabbat ka janaazaa nikla
baat itni si hai, apna bhi paraaya nikla

umr-e-rafta ko bhulaaoon to bhulaaoon kaise
bazm-e-tanhai mein har dam wo zamaana nikla

khat likhe lakh...
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