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Forum: Anjuman-e-Shayri 16th March 2013, 09:50 AM
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इश्तेहार बनगया----मुहम्मदअली वफा हमारे...

इश्तेहार बनगया----मुहम्मदअली वफा

हमारे जिस्मका चौला इश्तेहार बनगया
गदागीरी कहांकी, कारोबार बन गया

यहां तोडे मिनारे, मिहराबों पुजा घरको,
कभी जो तोडथा संग ,मुअम्मार बन गया

रहा ना बुलबुलोंको...
Forum: Anjuman-e-Shayri 21st January 2013, 06:40 AM
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रंग लाके रहेगी.-----मुहम्मदली वफा ये तेजो...

रंग लाके रहेगी.-----मुहम्मदली वफा

ये तेजो तुंद हवा, रंग लाके रहेगी,
मझ्लूमोंकी बद दुआ ,रंग लाके रहेगी

तु चाहे रहे उंचे फलक्बोस मकांनो में
झुग्गीसे गरीबोंकी सदा, रंग लाके रहेगी.

ये बाग सारे...
Forum: Anjuman-e-Shayri 10th September 2012, 01:58 PM
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शेखादम आबुवालाकी उर्दू शायरी-मुहम्मदअली

शेखादम आबुवालाकी उर्दू शायरी-मुहम्मदअली वफा
मैंने पकडातो है तेरा दामन
जान निकलेगी अब मेरे तनसे
एक टूकडा है मेरे कफन का
मेरे हाथोमें दामन नहीं है
* * * *
कोई आये न आये हमें क्या
आज...
Forum: Anjuman-e-Shayri 11th July 2012, 10:33 AM
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निकल आये---मुहम्मदअली वफा

निकल आये---मुहम्मदअली वफा

जलते हुए जज्बात निकल आये
तेरी ही कोई बात निकल आये

तलाश हो उम्मीद के सुरजकी
दर्दकी कोई रात निकल आये

गरद्नको छूपाये रखे फूलों से हम
कोई खंजर बपा हाथ निकल आये
Forum: Anjuman-e-Shayri 1st March 2012, 08:23 AM
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आपका मस्कन दिखलाएं---मुहम्मदली वफा

आपका मस्कन दिखलाएं---मुहम्मदली वफा


आओ तुम्हें गुजरातका मंजर दिखलायें
कब्रस्तांमें हम आपका मदफन दिखलायें

वॉट तो दे दो ! फिरसे ये मंजर दोहरांये
आपको अपना असली मस्कन दिखलाएं
Forum: Anjuman-e-Shayri 22nd January 2012, 06:54 AM
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1 رستے جوان ہے۔۔۔محمدعلی وفا کھندہر سا...

1
رستے جوان ہے۔۔۔محمدعلی وفا

کھندہر سا شہر ہو گیا رستے جوان ہے
ہے پرانی تختیاں سب اور نیے نام ہے

روتا رہا وہ باغ باں اُجڑی بہار پر
پتّے پتّے پر کُنندہ ایک بیان ہے

اُنکی نظر کا فاصلہ...
Forum: Anjuman-e-Shayri 22nd January 2012, 06:51 AM
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1 رستے جوان ہے۔۔۔محمدعلی وفا کھندہر سا...

1
رستے جوان ہے۔۔۔محمدعلی وفا

کھندہر سا شہر ہو گیا رستے جوان ہے
ہے پرانی تختیاں سب اور نیے نام ہے

روتا رہا وہ باغ باں اُجڑی بہار پر
پتّے پتّے پر کُنندہ ایک بیان ہے

اُنکی نظر کا فاصلہ...
Forum: Anjuman-e-Shayri 8th January 2012, 08:43 AM
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بھُوک ہَے صاحب۔--محمد علی وفا

بھُوک ہَے صاحب۔-محمد علی وفا

نِیکلا من سے بھُوت ہَےصاحب
مان لو سب یے جھُوٹ ہَے صاحب

پیٹ یے خالی کِس سے بھرتے
کھیت میں اُوگی بھُوک ہَے صاحب

اب سجا بندربانٹ یے پْیارے
یےبھی...
Forum: Anjuman-e-Shayri 19th December 2011, 09:08 AM
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پْیار مت کہیے مُحمّدعلی وفا

پْیار مت کہیے مُحمّدعلی وفا

مُکرا ہُواوعدے سے ہَے، یار مت کہیے
گرپاؤںمیں چُبھتا نہِین- خار مت کہیے ۔

ہردم خداکا ساتھ ہَے، جنگل بیانباں ہو
ہم چاہے اکیلے ہی سہی لاچار مت کہیے۔
...
Forum: Anjuman-e-Shayri 8th December 2011, 01:39 AM
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پتھّر نہِیں مِلا_ مُحمّدعلی وفا سر تو...

پتھّر نہِیں مِلا_ مُحمّدعلی وفا

سر تو یہاں موجوُد تھا پتھّر نہِیںمِلا،
ظالِم کو بیاںباں میںخنجر نہِیں مِلا۔

مجبُور کو سب راسْتےجنگل میں لے گۓ
منزِل تلک جانیکو رہبر نہی مِلا۔ ...
Forum: Anjuman-e-Shayri 25th November 2011, 07:18 AM
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چيخ کے نکلی --- محمدعلی وفا

چيخ کے نکلی --- محمدعلی وفا

اچھا ہوا تنہئياں سب ساتھ میں رہی
ورنہ شہركي بھیڑ یہاں سے چیخ کے نکلی

کب تک چھپاوگے تم یہ حقیقت کو
مقتول کی صدا خنجروں کوچيركے نکلی

اس آخری سانسكا کیسا تھا بلكنا...
Forum: Anjuman-e-Shayri 25th November 2011, 03:35 AM
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चीख के निकली---मुहम्मदअली वफा

चीख के निकली---मुहम्मदअली वफाअच्छा हुआ तनहाईयां सब साथ में रही
वरना शहरकी भीड यहांसे चीख के निकली

कब तक छुपाओगे तुम ये हकीकत को
मकतुलकी सदा खंजरोकों चीरके निकली

उस आखरी सांसका कैस था ...
Forum: Anjuman-e-Shayri 30th September 2011, 03:19 AM
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जबिहा तु बनेगामुहम्मदअली वफा

जबिहा तु बनेगामुहम्मदअली वफा

सब खून से रंगे है तेरे हाथ ये दोनो,
किस मुंहसे उनका मसिहा तु बनेगा?

नौटंकी अब तुझे तकिया नहीं देगी,
मजबह में अब तेरा जबिहा तु बनेगा.

किशकोल तेरी बद दुआओंसे...
Forum: Anjuman-e-Shayri 12th September 2011, 12:02 AM
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खूश्बू ठहर गई.मुहम्मदअली वफा

खूश्बू ठहर गई.मुहम्मदअली वफा

थोडी सी खिजां की यहां किस्मत संवर गई,
वो तो चले गये मगर जरा खूश्बू ठहर गई.

यादोंके झरोंखेसे गुम हो गई मता
अभी अभी यहांथी- अब वो किधर गई.

बरसोंकी अब ये बात...
Forum: Anjuman-e-Shayri 24th July 2011, 02:28 AM
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बिछड गयेमुहम्मदअली वफा बागके पंछी बिछड गये...

बिछड गयेमुहम्मदअली वफा

बागके पंछी बिछड गये
हारके मोती बिखर गये

हाथ न आई कोई पत्ती
पतझड में सब पिघल गये

23जुलाई2011
Forum: Anjuman-e-Shayri 29th May 2011, 09:09 AM
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जाम तक नहींमुहम्मदअली वफा

जाम तक नहींमुहम्मदअली वफा

ये मयकशी कैसी कि जाम तक नहीं
एक बुंद पीने के लिये दाम तक नहीं

फिर उसने सदा दी हमें उंची आवाज में
बेरुखी तो देखिये के नाम तक नहीं

25मे2011
Forum: Anjuman-e-Shayri 26th May 2011, 04:09 AM
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Bangladeswh TabligiIjtema

Bangdesh Tabligi Ijtema 2011

Hudredsand thousand people gathered in an Ijtema in Bangla desh near Dhakaa (Tungi)
The management was done voluntarily by the Bagladeshi brother voluntarily.and the...
Forum: Anjuman-e-Shayri 26th May 2011, 12:43 AM
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Gujarati Language Will Never Die Dr. Jani

Gujarati Language Will Never Die Dr. Jani
By: Firoz Khan[/B]
Speaking as chief guest at Gujarati Literature Diaspora Meet in North York last Saturday Dr.Balwant Jani, ex-vice chancellor of...
Forum: Anjuman-e-Shayri 12th May 2011, 03:49 AM
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सुरत बदलनी चाहिएमुअहम्मदअली वफा

सुरत बदलनी चाहिएमुअहम्मदअली वफा

ये गरीबोंके घर जलाना मेरा मक्सद नहीं
बेगुनाहोंका खून बहाना मेरा मकसद नहीं

इन्साफ के कठहरोंमें मुजरीम को खडा करदो
सिर्फ हंगामा,खडा कराना मेरा मकसद नही
...
Forum: Anjuman-e-Shayri 8th May 2011, 08:58 AM
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धज्जियां ऊडवाई गई मुहम्मदअली वफा

धज्जियां ऊडवाई गई मुहम्मदअली वफा


दास्ताने गम जो थी, वो फिरसे दोहराई गई
फिर हमारी ही गली में ये आग लगवाई गई

घेरा गया बे दर्दीसे फिरसे हमारे गांव को
एक एक पत्थर ईंटकी धज्जियां ऊडवाई गई
Forum: Anjuman-e-Shayri 3rd May 2011, 08:27 AM
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भूक है साहब.-मुहम्मदअली वफा

spel errorभूक है साहब.-मुहम्मदअली वफा

नीकला मनसे भूत है साहब.
मान लो सब ये झूट है साहब.

पेट ये खाली कीस से भरते
खेतमें ऊगी भूक है साहब.

अब सज़ा बंदरबांट ये प्यारे
ये अनोखी सी लूंट है साहब
Forum: Anjuman-e-Shayri 5th April 2011, 08:43 AM
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Forum: Anjuman-e-Shayri 29th March 2011, 11:49 AM
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रातें बसर हुईमुहम्मदअली वफा

रातें बसर हुईमुहम्मदअली वफा

अनजान रास्तोंकी देखो सफर हुई
होंसलोंके फासलों से भी गुजर हुई

टूटी सी तहनी पे बन गया मसकन
विरान सहरामेंभी रातें बसर हुई
29मएच2011
Forum: Anjuman-e-Shayri 20th February 2011, 06:40 AM
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जंजीर लिये बैठे हैं वो---मुहम्मदअली वफा ...

जंजीर लिये बैठे हैं वो---मुहम्मदअली वफा

हाथोमें जंजीर लिये बैठे हैं वो
जुलमकी जागीर लिये बैठे हैं वो


कीसी मासुम की गर्दन न बचे
मौतकी तस्वीर लिये बैठे हैं वो

हरएक बिमार उनकी आंखो में
Forum: Anjuman-e-Shayri 17th February 2011, 10:32 AM
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Recent updates of BAGEWAFA Urdu_Hindi 17Feb2011

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भारतीय गणतंत्र के साठ वर्ष : विहंगावलोकन- -प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र (http://भारतीय गणतंत्र के साठ वर्ष...
Forum: Anjuman-e-Shayri 14th January 2011, 11:50 AM
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गज़ल:प्यार मत कहियेमुहम्मदअली वफा

गज़ल:प्यार मत कहियेमुहम्मदअली वफा

मुकरा हुआ वादेसे है, यार मत कहिये,
गर पांवमें चुभता नहीं खार मत कहिये.

हरदम खुदाका साथ है ,जंगल बयांबां हो,
हम चाहे अकेले ही सही लाचार मत कहिये.

लद गई...
Forum: Anjuman-e-Shayri 31st December 2010, 12:29 AM
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Recent updates of BAGEWAFA Urdu_Hindi 10Dece.2010

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مہتمیم دارلعلوم مولانا مرغوب الرحمآن کا انتقال۔۔اُردو سہارا
एक शेरकौशिक अमीन
To Those of Us Born...
Forum: Anjuman-e-Shayri 2nd December 2010, 12:52 AM
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चुभती हुई कलममुहम्मदअली वफा

चुभती हुई कलममुहम्मदअली वफा

अल्फाज़ के शीशे तराशीमें गुजरी है सारी जिंदगी
हासिल में किरतास पर चुभती हुई मीली कलम

और प्यारमें भी वफा कुछ एसाही रहा मामला
दिलको खराशने में न आई कभी उनको शरम...
Forum: Anjuman-e-Shayri 23rd November 2010, 09:34 AM
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सलाम आया नहींमुहम्मदअली वफा

सलाम आया नहींमुहम्मदअली वफा

मुद्दत हुई कि आअपका कोई पयाम आया नहीं
सच पुछिये तो साकिया तेरा सलाम आया नहीं

हम ने तो समझाथा कि शायद ईन्साफ मयकदे में है
लबरेज की तो बात क्या खाली भी जाम...
Forum: Anjuman-e-Shayri 1st November 2010, 09:16 AM
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हसरत न कीजये_मुहम्मदअली वफा

हसरत न कीजये_मुहम्मदअली वफा

इजहारे इल्तेफातकी जहेमत न किजये
दिवारको भी कान है आहट न किजये

टूट ये जाएगी तो भला रोअंगे फूट कर
हदसे गुजरकर यार महोब्बत न किजये

इम्तेहां होगा तेरा अब कोई...
Forum: Anjuman-e-Shayri 28th October 2010, 10:33 AM
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पत्थर नहीं मीला_मुहम्मदअली वफा -

पत्थर नहीं मीला_मुहम्मदअली वफा


सर तो यहां मोज़ुद था पत्थर नहीं मीला,
जालिमको बयाबानमें खंजर नहीं मीला.

मजबूर को सब रास्ते पहाडॉं पे ले गये
मैज़िल तलक जानेको रहबर नही मीला.

कांटो की फसल...
Forum: Anjuman-e-Shayri 21st October 2010, 09:05 AM
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शोर मचातें हैं._मुहम्मदअली वफा

शोर मचातें हैं._मुहम्मदअली वफा
न जाने क्युं हमें वो आये दिन सतातें है,
अजीब रुस्वा तरीकों से हमें आजमाते हैं.

हमारी खामोशी उनके लिये कुल्फते जां बनी,
अब वो रोतें हैं, पीटतें हैं, मातम मनातें...
Forum: Anjuman-e-Shayri 3rd October 2010, 08:45 AM
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अपने बाग से-मुहम्मदअली वफा

अपने बाग से-मुहम्मदअली वफा



फूलके होते हैं चंद दिन बहार के,
कांटा निकलता नहीं अपने बाग से.

अपनी मोत से ये बिल्कुल मरा नहीं,
ये जईफ मर गया हसदकी आग से.
Forum: Anjuman-e-Shayri 20th September 2010, 11:44 AM
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हंस दियामुहम्मदअली वफा

हंस दियामुहम्मदअली वफा

सऊबते जिन्दान सहकर भी हमने हंस दिया
और हलाहल ज़हर पीकर भी हमने हंस दिया

जुल्मकी दीवारें चुनते ठक गये तुम ज़ालिमों
ये दारो रसन पर चढकर भी हमने हंस दिया ...
Forum: Anjuman-e-Shayri 15th September 2010, 10:31 AM
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हालात तो पूछलोमुहम्मदअली वफा

हालात तो पूछलोमुहम्मदअली वफा

आते जाते कोई भी बात तो पूछ लो
ईत्तेफाकन सही कुछ हालात तो पूछ लो

क्या भरोसा ईसका कब दिया बूझे
कितनी बची है तेलकी सोगात तो पूछ लो
14सेप्त2010
Forum: Anjuman-e-Shayri 11th September 2010, 06:58 AM
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आझाद नजम:कैसे ईद मनाएं ---मुहम्मदली वफा

http://bazmewafa.files.wordpress.com/2010/09/eidhug.jpgआझाद नजम:कैसे ईद मनाएं ---मुहम्मदली वफा


हर तरफ छाये हुए हैं मौत के साये
गोलियां ले कर तुम्हारे हाथभी आये

खून की नदीयों में बच्चें भी...
Forum: Anjuman-e-Shayri 6th September 2010, 10:59 AM
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नशेमनको तबाह करनामुहम्म्दअली वफा

नशेमनको तबाह करनामुहम्म्दअली वफा

तुम्हारे मुकद्दरमें लीखा, तीनकों को जमां करना
मिले कोई भी शाख घोंसला उसपे बपा करना

उसने कहां देखा कि में कीसको जलाती हुं
बर्कका काम है हरदम नशेमनको...
Forum: Anjuman-e-Shayri 8th August 2010, 05:09 AM
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मातम मनाए क्या?-मुहम्मदअली वफा

मातम मनाए क्या?-मुहम्मदअली वफा

अब तुम ही बताओ, उनसे निभाये क्या?
सोख्तां जां है सभी उनको बताए क्या ?

मतलबकी भी कहते गर गवाराथा हमे तो,
सब बे तूकी ही बात है, अब सुनाये क्या?

चेहरेकी...
Forum: Anjuman-e-Shayri 4th August 2010, 03:56 AM
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ढूंढ के लाओ---मुहम्मदअली वफा

ढूंढ के लाओ---मुहम्मदअली वफा
रहे ताबिंदा ये जिंदगी, हुनर को ढूंढ के लाओ.
गुजरी हुई वो शामो सहर को ढूंढ के लाओ.

कहां ठहरा हुआ है गुम शुदा वो वक्तका पानी,
डगर वो ढूंढ के लाओ नहर को ढूंढ के लाओ....
Forum: Anjuman-e-Shayri 28th July 2010, 08:49 AM
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ढूंढ के लाओ---मुहम्मदअली वफा

ढूंढ के लाओ---मुहम्मदअली वफा
रहे ताबिंदा ये जिंदगी, हुनर को ढूंढ के लाओ.
गुजरी हुई वो शामो सहर को ढूंढ के लाओ.

कहां ठहरा हुआ है गुम शुदा वो वक्तका पानी,
डगर वो ढूंढ के लाओ नहर को ढूंढ के...
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