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riste
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shakuntala vyas
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riste - 27th May 2010, 05:34 PM

रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

डॉ शकुंतला व्यास



Last edited by shakuntala vyas; 23rd April 2010 at 06:20 PM.. Reason: size


रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

डॉ शकुंतला व्यास



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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

डॉ शकुंतला व्यास



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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

डॉ शकुंतला व्यास



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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं
बहुत बैचेन और बेजान ही कर जाते हैं


आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है
वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है


हम यह जान कर भी इन में ही बंधते जाते हैं
मझदार में साथ छोड देगी एसी कसती से जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं
दूँढने जाते हैं मोती पर खरा पानी पी आते हैं


कई गहरे रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं
रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं

रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता


इन दुखों की चक्की में मन ही पिसता


डॉ शकुंतला व्यास


   
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Rashmi sharma
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16th August 2010, 04:29 PM

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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं

बहुत बैचेन और बेजान सा कर जाते हैं

आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है

वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है

हम जान कर भी, इन में ही बंधते जाते हैं

मझदार में साथ छोडे, वो कस्ति जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं

दूँढने जाते हैं ती पर खारा पानी पी आते हैं

रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं

रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं
 
रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता

इन दुखों की चक्की में मन ही पिस्ता

डॉ शकुंतला व्यास



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रिश्ते

रिश्ते मन के पंछी को केद कर जाते हैं
बहुत बैचेन और बेजान ही कर जाते हैं


आशाएं जगा, साँसों को क्यों रोक जाते है
वक़्त के साथ क्यों रिश्ते भी बदल जाते है


हम यह जान कर भी इन में ही बंधते जाते हैं
मझदार में साथ छोड देगी एसी कसती से जाते हैं

जब जब रिस्तो के समंदर में गोते लगते हैं
दूँढने जाते हैं मोती पर खरा पानी पी आते हैं


कई गहरे रिश्ते भी वक़्त के साथ मिठास खो जाते हैं
रिश्ते जीवन को बहुत ही रिक्त कर जाते हैं

रिश्ते देते जख्म जो हर पल है रिसता


इन दुखों की चक्की में मन ही पिसता


डॉ शकुंतला व्यास

very well written shakuntala ji .par rishte dukh dete hain to sukh bhi dete hain. jaise , aapke liye:-

mera tujse hai, janamo ka nata koi

youn hi nahin dil lubhata koi

   
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shakuntala vyas
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18th August 2010, 04:26 PM

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Originally Posted by Rashmi sharma View Post
very well written shakuntala ji .par rishte dukh dete hain to sukh bhi dete hain. jaise , aapke liye:-

mera tujse hai, janamo ka nata koi
youn hi nahin dil lubhata koi

sada klhush raho rasmi

tahedi se suker guzar hu

aaj kal ki duniya mai risto ka astitav bahut kum ho gaya hai

man me ek vichar aaya aur likha

hum doctors kabhi kabhi bahut kadva sach dekhte hai risto ka


sada khush raho

apki

shaku
   
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naresh_mehra110
Anshumali
naresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.comnaresh_mehra110 is the among the best Shayars at Shayri.com
 
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18th August 2010, 05:41 PM

RishtoN ko paribhaashit karti ... Shakuntala Ji .... aapki rachna padhnaa accha laga ... yunhi aur behtar koshish ke saath aate rahen aur likhte rahen...

duaaon ke saath ...




YuuN Besabab Aansoo Aate NahiN
Lag Zaroor Koii Baat Dil Ko Rahii Hai ...

Fareb Kaa ChaDhtaa Bazaar Dekh
Insaaf Se Bastii Khaalii Ho Rahii Hai ...


---Naresh Mehra----
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Aashique
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18th August 2010, 07:53 PM

Bohat Khoob PESH Kiyaa Hai Aapne...Labso Ko

Kyaa KhooB Likha Hai ..

Dil se Daad Kubool Kijiye

Be Happy

Take Care and Keep Smiling ..


   
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shakuntala vyas
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19th August 2010, 03:33 PM

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Originally Posted by naresh_mehra110 View Post
RishtoN ko paribhaashit karti ... Shakuntala Ji .... aapki rachna padhnaa accha laga ... yunhi aur behtar koshish ke saath aate rahen aur likhte rahen...

duaaon ke saath ...
thanks a lot

aapne mera honsala hamesha badhaya hai

sukerguzar hu

yese hi sath dete rahe

doctor hu vaqt kum milta hai yese hi shok he isliye likhaty hu

kuch kamiya lage to najarandaj kare

apke sahyog ke liye abhari hu

sada khush rahe
   
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ISHK EK IBADAT
RADHE RADHE
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Love 19th August 2010, 03:43 PM

shakuntla jee
radhe radhe

rishton me chhupe dard ko aapne sahi ujjagar kiya hai bas itna hi kahna chahunga ki rishte ke bina jeena sambhav nahi aur inse aksar dukh milte hain ye bhi sahi hai
achhi rahi aapki koshish
likhti rahen
duaon ke saath


Aapka Apna
Ishk


'इश्क' के बदले इश्क चाहना तिजारत है
इज़हार किससे करें महबूब तो दिल में है


email: rkm179@gmail.com
   
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shakuntala vyas
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19th August 2010, 04:57 PM

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Originally Posted by ISHK EK IBADAT View Post
shakuntla jee
radhe radhe

rishton me chhupe dard ko aapne sahi ujjagar kiya hai bas itna hi kahna chahunga ki rishte ke bina jeena sambhav nahi aur inse aksar dukh milte hain ye bhi sahi hai
achhi rahi aapki koshish
likhti rahen
duaon ke saath
tahedil se suker guzar hu

apane sahi kaha risto ke bina jina muskil hai magar aaj ke dor mai

risto me swarth itana bhar gaya hai ki riste RIKAT KAR JATE HAI MAN KO

JIVAN KA SATYA HAI JI

APANE SARAHA HIMMAT MILI AUR LIKHANE KE LIYE

APKA MERI POST KO PADHANA AUR PASAND KARNA MERA AHO BHGY HAI

SADA KHUSH RAHO
   
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parveen komal
devil ! forgive me
parveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to beholdparveen komal is a splendid one to behold
 
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19th August 2010, 05:24 PM

behadd khoobsoorati se aapne rishto.n ki haqeeqat baya.n ki . dil se daad


07666027379,09041116001,09876442643,
09417142513,09914097007,09625494246
Mail: parveenkomal@parveenkomal.com
www.parveenkomal.com/blog
{ BURA NA SUNENGE BURA NA DEKHENGE BURA NA BOLENGE
ACHHA LIKHENGE,KOI BURA KAHEGA TO KHUD KO TATOLENGE }


Wohi rizq deta jahaan ko , wohi zaat sab se azeem hai
Meri muflisi pe na hans ke wo , tera taaj sar se giraa na de
}QadeerToopchi{
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shakuntala vyas
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20th August 2010, 09:56 PM

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Originally Posted by parveen komal View Post
behadd khoobsoorati se aapne rishto.n ki haqeeqat baya.n ki . dil se daad
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sada khush rahe

jindagy ki hakikat hai use likhne ki kosis ki
   
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zainy
Aapki dost
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20th December 2010, 09:39 PM

good one..........................................




Zainy


PalkoN ki baand ko tod ke daaman pe aa gira
Ek aaNsu mere zabt ki tauheen kar gaya...

Nm
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